प्रेगनेंसी में 7 महीने में क्या क्या होता है?HealthPlanet

Posted on Mon 6th Feb 2023 : 16:15

गर्भावस्था के सातवें महीने में लक्षण | Pregnancy Ka 7 Mahina

गर्भावस्था के सातवें महीने में कुछ नए लक्षण नजर आते हैं। जरूरी नहीं कि सभी लक्षण अच्छा ही महसूस कराएं। कुछ लक्षण परेशानियां भी लेकर आते हैं। इस दौरान आपको कुछ ऐसा महसूस हो सकता है :

ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन : जैसे-जैसे गर्भावस्था का समय बढ़ेगा और आप सातवें महीने में कदम रखेंगी, वैसे-वैसे आपको ब्रेक्सटन हिक्स महसूस हो सकते हैं। यह हल्के-हल्के संकुचन होते हैं, जो 30 सेकंड से एक मिनट तक रह सकते हैं। ब्रेक्सटन हिक्स को ‘फाल्स लेबर’ भी कहा जाता है (1)।

योनि स्राव में वृद्धि : गर्भावस्था में योनि स्राव होना सामान्य है। शुरुआती समय में यह किसी भी तरह के संक्रमण को गर्भाशय तक पहुंचने से रोकता है। समय के साथ-साथ शिशु का सिर श्रोणि भाग पर दबाव डालता है, जिस कारण योनि से रिसाव होने लगता है। हालांकि, यह सामान्य है, लेकिन अगर आपको इस स्राव से दुर्गंध आने लगे, तो एक बार डॉक्टर से संपर्क कर लें।

स्तनों से रिसाव होना : गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में स्तनों से रिसाव होना शुरू हो जाता है। यह गाढ़ा और पीले रंग का पदार्थ होता है, जिसे ‘कोलोस्ट्रम’ कहते हैं। यह रिसाव दिन में किसी भी समय हो सकता है। जैसे-जैसे डिलीवरी का समय नजदीक आता है यह एकदम रंगहीन हो जाता है और ऐसा होना सामान्य प्रक्रिया है। यह जरूरी नहीं कि ऐसा सभी के साथ हो, लेकिन अगर किसी को ऐसा अनुभव हो, तो इसे सामान्य समझें।

अपच : गर्भावस्था में अपच की समस्या होना आम है। इस दौरान अक्सर पेट फूलना, छाती में जलन व जी-मिचलाना जैसा महसूस हो सकता है। यह समस्या तीसरी तिमाही में ज्यादा बढ़ जाती है। शिशु के विकसित होने से पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता, जिस कारण अपच की समस्या होने लगती है।

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में शरीर में होने वाले बदलाव

यह अब आपकी अंतिम तिमाही की शुरुआत है। इस समय तक आपका पेट और बढ़ जाएगा और कई तरह के शारीरिक बदलाव देखने को मिलेंगे। नीचे हम बता रहे हैं कि सातवें महीने के दौरान शरीर में क्या-क्या शारीरिक बदलाव देखने को मिलते हैं (2) :

सातवें महीने तक आपका वजन काफी बढ़ जाता है, जो गर्भावस्था में सामान्य है। इस समय तक आपका करीब पांच किलो वजन बढ़ सकता है। इसके अलावा, गर्भाशय बढ़ने के कारण पेट पर खिंचाव के निशान ज्यादा दिखने लगेंगे।

इस दौरान आपका गर्भाशय नाभि के ऊपर आ जाएगा और कभी-कभी सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। गर्भाशय ऊपर आने से आपको सोने में भी तकलीफ हो सकती है।

पहले के मुकाबले स्तन और बड़े हो जाएंगे। निप्पल के आसपास का रंग और गहरा हो सकता है।

इस समय पर आपका पेट लगातार बढ़ता जाता है, जिससे आपको चलने में और झुकने में समस्या हो सकती है।

शरीर में हो रहे तेज रक्त प्रवाह के चलते शरीर में सूजन आना सामान्य है। साथ ही गर्भावस्था के 7वें महीने के दौरान पैरों में दर्द भी हो सकता है।

वजन बढ़ने के कारण आपको सांस लेने में तकलीफ हो सकती है।

गर्भावस्था के सातवें महीने में बच्चे का विकास और आकार

गर्भावस्था के सातवें महीने तक शिशु का आधे से ज्यादा विकास हो जाता है।

आपका शिशु अब बाहर की आवाजों पर प्रतिक्रिया भी दे सकता है और अंगड़ाइयों के साथ जम्हाइयां भी लेता है।

इस महीने तक शिशु की पलकें और भौं आ जाती हैं।

अब शिशु आंखें खोल भी सकता है और बंद भी कर सकता है।

इसके अलावा, गर्भावस्था के सातवें महीने के अंत तक शिशु लगभग 14 इंच लंबा हो जाता है और उसका वजन एक किलो के आसपास हो सकता है (3)।

गर्भावस्था के सातवें महीने में देखभाल

गर्भावस्था का सातवां महीना आखिरी तिमाही की शुरुआत है। इस दौरान खास देखभाल की जरूरत होती है। आपकी जीवनशैली कैसी है, आप क्या खा रही हैं और किन चीजों से आप परहेज करती हैं, यह सब आपकी गर्भावस्था पर असर डालता है। अब हम बात करने जा रहे हैं गर्भावस्था के खान-पान की।

गर्भावस्था के सातवें महीने में खाएं ये चीजें | Pregnancy Ke 7 Month Me Kya Khana Chahiye

गर्भावस्था के सातवें महीने में आपको अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना होगा। यह गर्भावस्था की आखिरी तिमाही है, इसलिए आप जो भी खाएं पौष्टिक खाएं, ताकि आपको और शिशु को भरपूर पोषण मिले। जानिए इस दौरान क्या खाना चाहिए (4) :

आयरन युक्त खाद्य पदार्थ : तीसरी तिमाही में खून की कमी से बचने के लिए भरपूर मात्रा में आयरन युक्त भोजन खाना चाहिए।

कैल्शियम युक्त भोजन : गर्भावस्था में बच्चे के विकास के लिए कैल्शियम जरूरी है। खासतौर से तीसरी तिमाही में। हालांकि, इस दौरान अतिरिक्त कैल्शियम लेने की जरूरत नहीं होती।

मैग्नीशियम युक्त खाना : मैग्नीशियम, कैल्शियम को अवशोषित करने में मदद करता है। इसके अलावा, यह पैरों में होने वाली ऐंठन से राहत दिलाता है।

डीएचए से भरपूर खाना : डीएचए एक फैटी एसिड है, जो शिशु के दिमागी विकास के लिए जरूरी है। इसके लिए आप कम स्तर की मरकरी वाली मछली, संतरे का जूस, दूध व अंडा ले सकते हैं (5)।

फोलिक एसिड : शिशु के रीढ़ की हड्डी और दिमागी विकास के लिए फोलिक एसिड लेना जरूरी है। यह शिशु को स्पाइना बिफिडा जैसे विकार से बचाने में मदद करता है (6)। इसके लिए डॉक्टर गर्भवती को फोलिक एसिड के सप्लीमेंट्स भी देते हैं।

फाइबर युक्त भोजन : सातवें महीने के दौरान गर्भाशय काफी बढ़ जाता है, जिस कारण पेट का पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं कर पाता। इस वजह से अक्सर गर्भवती को कब्ज की समस्या रहती है। इससे बचने के लिए जितना हो सके फाइबर युक्त भोजन खाएं।

विटामिन-सी : आयरन को ठीक से अवशोषित करने के लिए विटामिन-सी का सेवन करना जरूरी है। विटामिन-सी के लिए आप संतरा व नींबू अपने खान-पान में शामिल कर सकती हैं।

गर्भावस्था के सातवें महीने में न खाएं ये चीजें

गर्भावस्था के सातवें महीने में सीने में जलन, पैरों में सूजन व कब्ज जैसी समस्याएं होना आम है। खान-पान में परहेज करने से इन समस्याओं से राहत पाई जा सकती हैं। जानिए, गर्भावस्था के सातवें महीने में क्या नहीं खाना चाहिए :

मसालेदार और ज्यादा फैट वाली चीजें : आपको इस दौरान ऐसी सभी चीजें खाने से बचना चाहिए, जिनमें तेल-मसालों का ज्यादा इस्तेमाल किया गया हो। इनसे सीने में जलन की समस्या बढ़ सकती है।

सोडियम का ज्यादा इस्तेमाल : शरीर में सूजन आना आम बात है। इससे बचने के लिए आपको सोडियम की मात्रा कम करनी होगी। ज्यादा नमक वाली चीजें जैसे चिप्स, डिब्बाबंद आहार व बाजार का अचार खाना कम करना चाहिए।

कैफीन, अल्कोहल : गर्भावस्था में शराब, तंबाकू, सिगरेट और कैफीन युक्त चीजें जैसे चाय-कॉफी के सेवन से बचना चाहिए। इनसे शिशु के विकास में बाधा पहुंचती है (7)।

जंक फूड : इस दौरान जंक फूड जैसे- पीज्जा, बर्गर और बाहर की चाट-पकौड़ियां खाने से बचें। ये चीजें आपके पाचन को खराब करती हैं और इनमें पोषक तत्व भी नहीं होते हैं। अगर ज्यादा ही मन करे, तो आप घर में ही ताजी सब्जियों जैसे गाजर, खीरा, टमाटर का सैंडविच खा सकती हैं। सैंडविच बनाने के लिए आप गेहूं के आटे की ब्रेड का इस्तेमाल करें।

चूंकि व्यायाम करना काफी फायदेमंद होता है, तो जानिए सातवें महीने के व्यायाम के बारे में।

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